शिक्षा अधिकार है और हम पढ़ना चाहत्ते हैं मैडम जी , साँसद से बोले स्ट्रीट चाइल्ड

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मथुरा : हम पढ़ना चाहते हैं , शिक्षा संविंधान के तहत मिला मूलभूत अधिकार है , हम स्टेशन पर भीख माँगा करते थे किन्तु जब पढ़ाई शुरू की तो रेल अधिकारियों की नज़र लग गयी। ये शब्द थे स्टेशन पर भीख माँग कर गुजारा करने वाले उन बच्चो के जिनकी रेलवे की भूमि पर बनी झोपड़ियों को पिछले हफ्ते तोड़ दिया। अब यह बच्चे बेघर हैं। रक्षाबंधन पर होटल राधा अशोक में स्ट्रीट बच्चे सांसद हेमा मालिनी के राखी बांधने गए तो उन्होंने मदद की गुहार लगाई। बच्चों का कहना था कि हम पढ़ना चाहते हैं, हमारी मदद कीजिए। बच्चों ने सांसद को मांग पत्र सौंपकर किसी सरकारी योजना में आवास दिलाने की मांग की। जस्टिस फॉर चिल्ड्रन उप्र. संस्थापक एव स्ट्रीट स्कूल संचालक सतीश चंद्र शर्मा और शशि सक्सेना के नेतृत्व मे झोपड़ियो मे रहने वाले बच्चे सोमवार को सुबह 11 बजे सांसद हेमा मालिनी से मिलने पहुंचे। बच्चों ने उन्हें राखी बांधी और अपना मांगपत्र सौंपकर शिक्षा एवं बाल अधिकारों के सुरक्षा की मांग की। सांसद ने बच्चों को हर संभव मदद करने का आश्वासन देते हुए मिठाई खिला पढ़ने का आशीर्वाद दिया।ध्यान रहे कि ये स्ट्रीट बच्चे रेलवे स्टेशन और अन्य जगह भिक्षावृति करते थे। सतीश शर्मा ने इन बच्चों का रूख भिक्षावृति से मोड़कर पढ़ाई की तरफ किया। 41 बच्चों को सरकारी और निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया। यह बच्चे गोपाल नगर की तरफ रेलवे की भूमि पर झोंपड़ी बनाकर परिवार के साथ रहते थे। पिछले सप्ताह रेलवे अधिकारियों ने इनकी झोंपड़ियां उजाड़ दीं। अब बच्चों के सामने पढ़ाई को जारी रखने का संकट पैदा हो गया है।

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